आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि 2024-25 में फंडिंग उपलब्ध होने के बावजूद निजी निवेश कमजोर रहा। नई परियोजनाओं की घोषणा घटी, जिससे भविष्य की तस्वीर धुंधली है। ट्रंप के अमेरिकी टैरिफ और कमजोर मांग से कंपनियाँ सतर्क बनी हुई हैं, भले ही बैलेंस शीट मजबूत हो गई हैं।
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2024-25 में कुल निजी कैपेक्स स्थिर, सरकार की कोशिशों के बावजूद
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नई परियोजना घोषणाएँ घटीं, भविष्य का निवेश अनिश्चित
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फंडिंग उपलब्ध: इक्विटी, कर्ज, विदेशी उधारी
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आरबीआई: कंपनियों के पास ज्यादा नकद, बेहतर लाभप्रदता
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फिर भी नीति अनिश्चितता और कमजोर मांग से निवेश ठंडा
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इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश का मुख्य हिस्सा, 40–75% दशकभर में
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ऊर्जा क्षेत्र अग्रणी, सौर व पवन में बढ़ा निवेश Q1 2025-26
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पारंपरिक ऊर्जा परियोजनाओं में भारी गिरावट
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गुजरात-महाराष्ट्र को मिला 36.5% नया बैंक/एफआई निवेश
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यूपी का निवेश हिस्सा तेज़ी से घटा
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निजी क्षेत्र का कुल फिक्स्ड निवेश में हिस्सा 2023-24 में 33.6%
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घर बनाने वाले परिवारों ने खाली जगह भरी





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