आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि 2024-25 में फंडिंग उपलब्ध होने के बावजूद निजी निवेश कमजोर रहा। नई परियोजनाओं की घोषणा घटी, जिससे भविष्य की तस्वीर धुंधली है। ट्रंप के अमेरिकी टैरिफ और कमजोर मांग से कंपनियाँ सतर्क बनी हुई हैं, भले ही बैलेंस शीट मजबूत हो गई हैं। BulletsIn 2024-25 में कुल निजी कैपेक्स




