भारत अपनी लंबी दूरी की प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करने की दिशा में अग्नि-6 मिसाइल विकास कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी में है, जो एक महत्वपूर्ण रक्षा उपलब्धि है।
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- डीआरडीओ प्रमुख ने पुष्टि की है कि संगठन अग्नि-6 मिसाइल परियोजना शुरू करने के लिए तकनीकी रूप से पूर्ण रूप से तैयार है, अंतिम निर्णय सरकार पर निर्भर है।
- अग्नि-6 को एक उन्नत अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल के रूप में विकसित किया जाएगा, जो भारत की रणनीतिक मारक क्षमता को बढ़ाएगी।
- यह कार्यक्रम भारत की स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी क्षमता और आधुनिक युद्ध प्रणाली विकास की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्शाता है।
- अग्नि-6 में पहले की अग्नि श्रृंखला की तुलना में अधिक दूरी, बेहतर सटीकता और उच्च उत्तरजीविता क्षमता होने की संभावना है।
- यह विकास भारत की परमाणु प्रतिरोध रणनीति और वैश्विक सुरक्षा संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य को मजबूत करता है।
- डीआरडीओ हाइपरसोनिक हथियार प्रणाली पर भी कार्य कर रहा है, जिसमें हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन आधारित मिसाइल शामिल हैं।
- हाइपरसोनिक प्रणाली क्रूज मिसाइलों से भिन्न होती है क्योंकि यह अत्यधिक गति से ग्लाइड करती है और प्रारंभिक वेग के लिए बूस्टर पर निर्भर रहती है।
- भारत अपनी पारंपरिक मिसाइल क्षमता का भी विस्तार कर रहा है, जिसमें कम, मध्यम और लंबी दूरी की प्रणालियां शामिल हैं।





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