भारत में बार-बार टैक्स कटौती कर अर्थव्यवस्था को गति देने की कोशिश हुई, लेकिन नतीजे मिले-जुले रहे। 1997 के “ड्रीम बजट” से लेकर 2025 की जीएसटी कटौती तक, असर घरेलू मांग, वैश्विक हालात और सरकारी खर्च पर निर्भर रहा। सबक साफ है—टैक्स कटौती अल्पकालिक मदद देती है, लेकिन दीर्घकालिक असर अनिश्चित रहता है।
BulletsIn
- टैक्स कटौती से आय और कीमत असर से माँग बढ़ती है
- 1997: ड्रीम बजट में टैक्स घटे, ड्यूटी सरल हुई, ग्रोथ लौटी
- वेतन वृद्धि और टैक्स कलेक्शन ने घाटा सीमित रखा
- 2009: संकट के दौरान टैक्स कटौती से 8.5% ग्रोथ, असर छोटा
- सब्सिडी, महँगा क्रूड, कमजोर निर्यात से घाटा बढ़ा
- 2012 तक महँगाई 10.2%, रुपया गिरा, भारत “फ्रैजाइल फाइव” में
- 2019: कॉरपोरेट टैक्स घटकर 25.17% और 17.16% हुआ
- कंपनियों ने निवेश नहीं किया, कर्ज चुकाया, कैश बढ़ाया
- मुनाफा 22% बढ़ा, रोजगार केवल 1.5% बढ़ा
- 2025: जीएसटी कटौती असर कीमत गिरने, माँग, निर्यात पर निर्भर





What do you think?
It is nice to know your opinion. Leave a comment.