देवबंद आंदोलन 1866 में सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) के दारुल उलूम देवबंद से शुरू हुआ। इसकी स्थापना मुहम्मद क़ासिम नानौतवी और राशिद अहमद गंगोही ने की। इसका उद्देश्य इस्लाम की मूल शिक्षाओं का पुनर्जागरण, विदेशी शासन का विरोध और मुस्लिम पहचान की रक्षा था।
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- 1866 में दारुल उलूम देवबंद, सहारनपुर में स्थापना
- संस्थापक: मुहम्मद क़ासिम नानौतवी, राशिद अहमद गंगोही
- शाह वलीउल्लाह के सुधारवादी विचारों से प्रेरित
- लक्ष्य: क़ुरान-हदीस की शिक्षा, विदेशी शासन का विरोध
- नियमित पाठ्यक्रम और परीक्षा वाली औपचारिक मदरसा प्रणाली
- सैयद अहमद ख़ान के अलीगढ़ आंदोलन का विरोध
- 1888 में कांग्रेस के समर्थन में फ़तवा जारी
- सूफी मत स्वीकार लेकिन कर्मकांड, दरगाह पूजा का विरोध
- महमूद-उल-हसन ने आंदोलन को राजनीतिक रूप दिया
- शिब्ली नोमानी ने आधुनिक विज्ञान को पाठ्यक्रम में जोड़ा
- मदरसों और फ़तवों से आंदोलन पूरे देश में फैला
- मुस्लिम राजनीतिक चेतना के निर्माण में बड़ी भूमिका





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