भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुयाना की संसद में अपने ऐतिहासिक भाषण में “लोकतंत्र पहले, मानवता पहले” की सोच पर जोर दिया, यह दौरा 56 वर्षों में किसी भारतीय पीएम की पहली यात्रा है।
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- भारत की नीतियां विश्वास, पारदर्शिता और विस्तारवाद से दूर रहती हैं।
- “लोकतंत्र पहले, मानवता पहले” का मंत्र साझा प्रगति और सहयोग के लिए जरूरी बताया।
- संघर्ष के कारणों को खत्म करने पर बल दिया।
- संसाधनों जैसे अंतरिक्ष और समुद्र का साझा उपयोग करने की अपील की।
- वैश्विक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए समावेशी विकास पर जोर।
- “मानवता पहले” के आधार पर निर्णय लेने का संदेश दिया।
- भारत ने संकटग्रस्त देशों की मदद कर अपनी वैश्विक मित्रता का उदाहरण पेश किया।
- राष्ट्रों के बीच साझेदारी और सामूहिक प्रगति की आवश्यकता बताई।
- गुयाना यात्रा ने दोनों देशों के लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत किया।
- मोदी ने संघर्ष से ऊपर वैश्विक सहयोग की प्राथमिकता पर जोर दिया।





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