भारत में IPC की धारा 499 और 500 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा वैध ठहराए जाने के बाद यह सवाल बढ़ा है कि मानहानि अपराध रहे या केवल सिविल विवाद।
BulletsIn
* भारत में मानहानि सिविल और क्रिमिनल दोनों रूपों में मान्य।
* आलोचकों का तर्क कि आपराधिक मानहानि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करती है।
* सत्य बोलने पर भी अपराध बन सकता है यदि “लोकहित” साबित न हो।
* लिखित या मौखिक बयान न होने पर भी साज़िश के आधार पर केस संभव।
* मृत व्यक्तियों पर टिप्पणी भी अपराध मानी जा सकती है, जिसे अत्यधिक माना जाता है।
* समर्थकों के अनुसार सम्मान की रक्षा अनुच्छेद 21 का हिस्सा है।
* सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूर्ण नहीं; उचित सीमाएँ आवश्यक।
* नागरिकों की आर्थिक क्षमता सीमित, इसलिए केवल सिविल उपाय पर्याप्त नहीं।
* कानून के दुरुपयोग को उसे असंवैधानिक घोषित करने का आधार नहीं माना गया।
* आगे के सुझाव: कठोर दंड हटाना, उच्च प्रमाण-स्तर, राज्य की भूमिका सीमित करना।





What do you think?
It is nice to know your opinion. Leave a comment.