हिरासत में हिंसा तब होती है जब गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए व्यक्ति के साथ पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार किया जाता है। भारत में बार-बार होने वाली हिरासत मौतें और कम सजा दर गंभीर चिंता का विषय हैं।
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हिरासत हिंसा में पुलिस द्वारा अत्याचार शामिल
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2001–2018 में 1,727 हिरासत मौतें, केवल 26 दोषसिद्धि
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संविधान के अनुच्छेद 20, 21, 22 का उल्लंघन
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सुप्रीम कोर्ट ने यातना को गंभीर मानवाधिकार हनन बताया
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शारीरिक, मानसिक और यौन हिंसा के रूप
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केस सुलझाने का दबाव, स्टाफ की कमी मुख्य कारण
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राजनीतिक दबाव से पुलिस हिंसा बढ़ती है
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भारत में अभी कोई विशेष एंटी-टॉर्चर कानून नहीं
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हिंसा से भरोसा टूटता, मानसिक असर गहरा
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समाधान: प्रशिक्षण, तकनीक, निगरानी, UN टॉर्चर कन्वेंशन लागू करना





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