अफगान क्रिकेटर राशिद खान और मोहम्मद नबी ने तालिबान के हालिया फैसले की निंदा की है, जिसमें महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधित क्षेत्रों जैसे नर्सिंग और मिडवाइफरी की पढ़ाई करने से रोक दिया गया है। दोनों क्रिकेटरों ने इस कदम को “दिल तोड़ने वाला” बताया और तालिबान से इस फैसले को पलटने की अपील की, साथ ही इस्लाम में सभी के लिए शिक्षा की महत्ता पर जोर दिया। यह निर्णय 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद महिलाओं की शिक्षा पर लगाए गए प्रतिबंधों की एक और कड़ी है।
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- राशिद खान और मोहम्मद नबी ने तालिबान के स्वास्थ्य शिक्षा में महिलाओं को रोकने के फैसले की निंदा की।
- दोनों क्रिकेटरों ने इसे “दिल तोड़ने वाला” बताते हुए फैसले को पलटने की अपील की।
- राशिद खान ने इस्लाम में पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए शिक्षा की महत्ता को रेखांकित किया और इस प्रतिबंध को अफगान महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन बताया।
- राशिद ने अफगानिस्तान में महिला डॉक्टरों और नर्सों की कमी को लेकर चिंता व्यक्त की, खासकर महिलाओं के स्वास्थ्य सेवा के लिए।
- मोहम्मद नबी ने भी इसे “गहरे अन्याय” के रूप में आलोचना की और तालिबान से लड़कियों को पढ़ाई करने की अनुमति देने की अपील की।
- यह प्रतिबंध तालिबान के 2021 में सत्ता में लौटने के बाद महिलाओं की शिक्षा पर लगाए गए प्रतिबंधों का नवीनतम कदम है।
- UNAMA (संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन) ने इस फैसले पर गहरी चिंता व्यक्त की, यह कहते हुए कि इससे अफगानिस्तान की स्वास्थ्य सेवाओं और विकास को नुकसान होगा।
- यूरोपीय संघ ने तालिबान के इस कदम की निंदा की और इसे महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन बताया।
- तालिबान का यह फैसला सुप्रीम लीडर के आदेश के तहत लिया गया था, हालांकि सरकार ने इसका आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है।
- यह प्रतिबंध महिलाओं के लिए सार्वजनिक और निजी संस्थानों में मेडिकल पाठ्यक्रमों पर लागू होगा, और नए नियम के प्रभाव में आने से पहले परीक्षा आयोजित की जाएगी।





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