वक्फ अधिनियम, 2025 की वैधता को लेकर सुनवाई में भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगे और याचिकाकर्ताओं से संतुलित दृष्टिकोण रखने को कहा। कोर्ट ने धार्मिक बोर्डों में अंतर-धार्मिक सदस्यता और ‘वक्फ बाय यूजर’ प्रावधान हटाने पर सवाल उठाए।
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- CJI ने सरकार से धार्मिक बोर्डों में अंतर-धार्मिक सदस्यता के उदाहरण मांगे, स्पष्ट उत्तर नहीं मिला
- कोर्ट ने ‘वक्फ बाय यूजर’ हटाने पर चिंता जताई; वास्तविक मामलों को नुकसान हो सकता है
- सरकार ने बॉम्बे पब्लिक ट्रस्ट एक्ट का हवाला दिया, कोर्ट ने असंगत बताया
- याचिकाकर्ताओं ने लिमिटेशन एक्ट लागू होने पर आपत्ति जताई, कब्जा हटाने में रुकावट हो सकती है
- CJI ने कहा, लिमिटेशन एक्ट के फायदे-नुकसान दोनों हैं
- 2025 कानून ने वक्फ को लिमिटेशन एक्ट से दी गई छूट समाप्त कर दी
- याचिकाकर्ताओं ने कहा, नया कानून मुस्लिम उत्तराधिकार में दखल देता है; CJI ने असहमति जताई
- नया कानून स्पष्ट करता है कि वक्फ से महिलाओं सहित वैध उत्तराधिकार नहीं छिनेंगे
- दलील दी गई कि वक्फ का प्रबंधन इस्लाम की आवश्यक धार्मिक प्रथा है
- कोर्ट ने कहा, अनुच्छेद 26 और आवश्यक धार्मिक प्रथा को एक साथ न मिलाएं





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