वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2025 में शहरी विकास को भारत के आर्थिक बदलाव के प्रमुख स्तंभ के रूप में प्राथमिकता दी गई है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय को अब तक की सबसे अधिक राशि आवंटित की गई है, जबकि अर्बन चैलेंज फंड और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) जैसी नई पहल शहरी बुनियादी ढांचे को सशक्त बनाएंगी।
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- शहरी विकास के लिए ₹96,777 करोड़ का आवंटन, 2024 में ₹79,000 करोड़ था।
- पीएम आवास योजना (PMAY), स्मार्ट सिटी मिशन और AMRUT को अधिक फंडिंग मिली।
- शहरी परिवहन परियोजनाओं, विशेष रूप से मेट्रो और मास ट्रांजिट सिस्टम को प्राथमिकता।
- ₹1 लाख करोड़ का अर्बन चैलेंज फंड शहरी सुधार के लिए शुरू किया गया।
- फंड 25% तक की परियोजना लागत को कवर करेगा, शेष 50% बॉन्ड, ऋण या PPP से आएगा।
- शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को अपने स्वयं के राजस्व स्रोत बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
- ULBs सरकार पर निर्भर; बड़े शहर कर और शुल्क से राजस्व उत्पन्न करते हैं।
- म्युनिसिपल बॉन्ड लोकप्रियता में वृद्धि; इंदौर, पुणे, अहमदाबाद जैसे शहरों ने इसका उपयोग किया।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को शहरी अवसंरचना वित्तपोषण के लिए बढ़ावा दिया गया।
- बजट 2025-26 शहरी विकास को गति देता है, जिससे शहर आर्थिक प्रगति को आगे बढ़ा सकें।





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