भारत का सर्वोच्च न्यायालय 15 अप्रैल 2025 को जीएम सरसों की व्यावसायिक खेती के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा विकसित इस हाइब्रिड सरसों (DMH-11) को 2022 में GEAC से मंजूरी मिली थी, लेकिन पर्यावरणविदों और किसानों के विरोध के चलते इसे लेकर विवाद बना हुआ है।
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- जीएम सरसों (DMH-11) को “वरुणा” और “अर्ली हीरा-2” सरसों की क्रॉस-ब्रीडिंग से विकसित किया गया है।
- इसमें तीन जीन (बर्नेस, बारस्टार और बार) डाले गए हैं, जो क्रॉस-पॉलिनेशन और खरपतवार-रोधी क्षमता में मदद करते हैं।
- 15 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट में GEAC की मंजूरी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई होगी।
- आलोचकों का कहना है कि जीएम फसलें पारंपरिक पौधों से क्रॉस-ब्रीड होकर जैव विविधता को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
- तकनीकी विशेषज्ञ समिति (TEC) ने पहले ही हर्बिसाइड टॉलरेंट फसलों पर रोक की सिफारिश की थी।
- बीटी कपास, पहली जीएम फसल, ने न तो उपज में सुधार किया और न ही कीट नियंत्रण में मदद की।
- इसके फूलों में नेक्टर की कमी से मधुमक्खियाँ गायब हो गईं, जिससे शहद उत्पादन बंद हो गया।
- किसानों को अब ज्यादा कीटनाशक छिड़कने पड़ रहे हैं, पर्यावरणीय जोखिम बढ़ा है।
- जीईएसी पर विदेशी डेटा पर भरोसा करने और सार्वजनिक विमर्श से बचने का आरोप।
- विशेषज्ञों की मांग: स्वदेशी अध्ययन, किसान अधिकार संरक्षण और पारदर्शिता ज़रूरी।





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