लखनऊ में एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने छात्रों और युवाओं से वैश्विक जलवायु संकट का सामना करने की जिम्मेदारी लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष से दिखता है कि पृथ्वी ही मानवता का एकमात्र घर है, इसलिए सामूहिक समाधान और नैतिक दृष्टि दोनों आवश्यक हैं।
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- कहा पृथ्वी ही एकमात्र घर; “कहीं और जाने की जगह नहीं।”
- जलवायु परिवर्तन को साझा वैश्विक संकट बताया; सामूहिक कदम जरूरी।
- चेतावनी कि अंतरिक्ष विस्तार में धरती जैसी गलतियाँ न दोहराएँ।
- उपग्रहों ने जलवायु परिवर्तन के ठोस वैश्विक प्रमाण दिए।
- चुनौती जागरूकता नहीं, समाधान पर सहमति बनाना है।
- युवाओं से वैश्विक सहमति का ढांचा तैयार करने की अपील।
- अंतरिक्ष गतिविधि तेज: 13,000 उपग्रह, लक्ष्य लगभग 40,000।
- भविष्य की अंतरिक्ष खोज में नैतिक और आचारिक खतरे बताए।
- छात्रों से मुद्दों को गहराई से समझकर जिम्मेदारी से कार्य करने का आग्रह।





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