अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान ने उन्नत अनुसंधान अनुदान के लिए नए प्रकटीकरण नियम लागू किए जिससे शोध में पारदर्शिता जवाबदेही और गुणवत्ता को मजबूत बनाया जा सके।
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- नए नियमों के अनुसार सभी प्रधान अन्वेषक और सह अन्वेषकों को पिछले 5 वर्षों में हुए शोध पत्र वापसी के कारण और विवरण अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने होंगे।
- उन्नत अनुसंधान अनुदान योजना के अंतर्गत चयनित परियोजनाओं को अधिकतम 5 वर्षों की अवधि के लिए 5 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
- आवेदन प्रक्रिया में 15 मई से 10 जून 2026 तक ऑनलाइन पूर्व प्रस्ताव जमा करना अनिवार्य किया गया है जिससे चयन प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित बनी रहे।
- आवेदकों को यह प्रमाणित करना होगा कि उनका प्रस्ताव कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा तैयार नहीं है और यदि उपयोग किया गया है तो उसका स्पष्ट उल्लेख करना आवश्यक होगा।
- इस योजना में साहित्यिक चोरी के प्रति शून्य सहनशीलता नीति अपनाई गई है और प्रस्तावों की जांच के लिए तृतीय पक्ष मूल्यांकन प्रक्रिया लागू की जा सकती है।
- संशोधित नियमों के तहत राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के लिए 50 प्रतिशत लागत साझेदारी की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है जिससे अधिक संस्थानों को अवसर प्राप्त होगा।
- अब अधिकतम 5 सह अन्वेषक विभिन्न संस्थानों से शामिल हो सकते हैं जिससे सहयोगात्मक और बहुविषयक शोध को बढ़ावा मिलेगा और शोध गुणवत्ता में सुधार होगा।
- इन सुधारों का उद्देश्य शोध की विश्वसनीयता बढ़ाना नैतिक मानकों को मजबूत करना और वैज्ञानिक अनुसंधान में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।





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