इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वन अधिकार अधिनियम 2006 के प्रावधानों को पुनः स्पष्ट करते हुए कहा कि वनवासियों के अधिकार पुराने आदेशों से ऊपर हैं।
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- न्यायालय ने लखीमपुर के जिला स्तरीय समिति के निर्णय में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि बाद के कानून के विपरीत पूर्व आदेश अमान्य माने जाएंगे।
- निर्णय में स्पष्ट किया गया कि वन अधिकार अधिनियम 2006 को प्राथमिकता प्राप्त है और यह वनवासियों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करता है।
- मामला चराई प्रतिबंध से संबंधित था जहां पहले लगाए गए व्यापक प्रतिबंध अधिनियम द्वारा दिए गए अधिकारों से टकराते थे।
- न्यायालय ने कहा कि वनवासियों को बिना अधिकारों की मान्यता और प्रक्रिया पूर्ण किए बिना बेदखल नहीं किया जा सकता है।
- निर्णय में यह भी कहा गया कि चराई और आजीविका से जुड़े कार्य वन समुदायों के मूल अधिकार हैं जिन्हें कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
- न्यायालय ने प्रशासनिक त्रुटियों को उजागर किया जहां अधिकारियों ने कानून के प्रावधानों की अनदेखी कर निर्णय लिए थे।
- आदेश में जिला स्तरीय समितियों को निर्देश दिया गया कि वे अधिनियम के अनुसार ही कार्रवाई करें और अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करें।
- यह निर्णय जनजातीय और वन आश्रित समुदायों के अधिकारों को मजबूत करता है तथा संरक्षण और आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करता है।





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