मानव गतिविधियों में वृद्धि के कारण महासागरों में ध्वनि प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। बढ़ता समुद्री यातायात, ऊर्जा खोज और सैन्य गतिविधियाँ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर चुनौती बन रही हैं।
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• वाणिज्यिक जहाज सबसे बड़ा स्रोत, इंजन और प्रोपेलर से निरंतर पानी के भीतर शोर उत्पन्न होता है।
• तेल–गैस खोज में प्रयुक्त सिस्मिक एयर गन शक्तिशाली ध्वनि विस्फोट करती हैं, समुद्री वातावरण बाधित।
• नौसैनिक सोनार, पाइल-ड्राइविंग, मछली पकड़ने वाली नावें भी शोर प्रदूषण में प्रमुख योगदान देती हैं।
• अध्ययनों के अनुसार कई क्षेत्रों में 1960 के दशक से ध्वनि स्तर हर दशक दोगुना हुआ।
• समुद्री जीव संचार, दिशा-निर्धारण और भोजन खोज हेतु ध्वनि पर निर्भर रहते हैं।
• शोर के कारण व्हेल और डॉल्फिन की प्राकृतिक ध्वनि प्रणाली प्रभावित होती है।
• प्रभावों में तनाव, व्यवहार परिवर्तन, सुनने की क्षमता में कमी और स्ट्रैंडिंग जोखिम शामिल।
• भारत की 7,500-किमी तटरेखा घने समुद्री मार्गों के कारण अधिक संवेदनशील।
• बढ़ता शोर जैव विविधता और लाखों लोगों की मत्स्य आधारित आजीविका को प्रभावित करता है।
• समाधान: जहाज गति घटाना, शांत तकनीक अपनाना, समुद्री ‘क्वाइट ज़ोन’ और सख्त नियम लागू करना।





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