मल्टी-स्टेट सहकारी समितियां संशोधन विधेयक 2022 का उद्देश्य बहु-राज्य सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक सुधार लाना है।
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मल्टी-स्टेट सहकारी समितियां वे संस्थाएं हैं जो एक से अधिक राज्यों में कार्य करती हैं और 2002 के अधिनियम के तहत पंजीकृत होती हैं।
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विधेयक किसी भी सहकारी समिति को दो-तिहाई बहुमत से मौजूदा मल्टी-स्टेट सहकारी समिति में विलय की अनुमति देता है।
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इसमें केंद्रीय सरकार द्वारा नियुक्त सहकारी चुनाव प्राधिकरण की स्थापना का प्रावधान है जो चुनाव प्रक्रिया संचालित करेगा।
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धोखाधड़ी या अनियमितताओं पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया है, जिसमें जुर्माना और कारावास शामिल है।
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सदस्यों की शिकायतों के निवारण हेतु सहकारी लोकपाल की नियुक्ति का प्रस्ताव है, जिसे सिविल न्यायालय जैसी शक्तियां होंगी।
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बीमार सहकारी समितियों के पुनरुद्धार के लिए सहकारी पुनर्वास, पुनर्निर्माण और विकास कोष स्थापित करने का प्रावधान है।
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निदेशक मंडल में एक अनुसूचित जाति या जनजाति सदस्य तथा दो महिला सदस्यों को शामिल करना अनिवार्य किया गया है।
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आलोचकों का कहना है कि यह विधेयक संघीय ढांचे के विरुद्ध है और केंद्र सरकार का नियंत्रण बढ़ाता है।





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