ई-गवर्नेंस सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से सार्वजनिक सेवाओं को सशक्त बनाकर पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-सरकार-व्यवसाय संबंधों को मजबूत करता है।
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ई-गवर्नेंस का अर्थ है सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का उपयोग कर सरकारी सेवाएं प्रदान करना, लेनदेन करना, सूचनाओं का आदान-प्रदान और डिजिटल प्लेटफॉर्म का एकीकरण करना।
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यह प्रशासनिक लागत कम करता है, सार्वजनिक धन के कुशल उपयोग को बढ़ाता है, निगरानी तंत्र मजबूत करता है, डेटा आधारित नीतिनिर्माण को सक्षम बनाता है और पारदर्शिता को प्रोत्साहित करता है।
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नागरिकों को पारदर्शिता, त्वरित शिकायत निवारण, भौगोलिक सीमाओं से परे सेवाओं की पहुंच और जवाबदेही के माध्यम से विशेषकर कमजोर वर्गों को सशक्तिकरण मिलता है।
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व्यवसायों को सरल अनुपालन प्रक्रियाएं, कागजरहित लेनदेन, शीघ्र स्वीकृतियां, डिजिटल बाजार विस्तार और बेहतर कारोबारी सुगमता का लाभ मिलता है।
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प्रमुख पहलों में डिजिटल इंडिया, आधार, डिजीलॉकर, उमंग, स्वयं, दीक्षा, एजीमार्कनेट, नारी पोर्टल, आरोग्य सेतु और विभिन्न डिजिटल सेवा प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
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प्रमुख चुनौतियों में साइबर सुरक्षा जोखिम, उच्च अवसंरचना लागत, ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल विभाजन, भाषा बाधाएं, कम डिजिटल साक्षरता और राज्यों में असमान क्रियान्वयन शामिल हैं।
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आगे की दिशा में डिजिटल अवसंरचना में निवेश, सार्वजनिक-निजी भागीदारी, प्रशासनिक पुनर्रचना, कौशल विकास, स्वदेशी तकनीक प्रोत्साहन और क्लाउड आधारित समाधान आवश्यक हैं।





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