सील्ड कवर जूरिस्प्रूडेंस वह न्यायिक प्रक्रिया है जिसमें सरकार संवेदनशील जानकारी अदालत को सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करती है, जिसकी पहुँच केवल न्यायाधीशों तक होती है।
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सील्ड कवर जूरिस्प्रूडेंस के तहत सरकारी एजेंसियाँ गोपनीय दस्तावेज़ अदालत को सीलबंद लिफाफे में सौंपती हैं, जिन्हें केवल न्यायाधीश देख सकते हैं।
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इसका औचित्य राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, व्यक्तिगत गोपनीयता और लंबित जाँच को प्रभावित होने से बचाने के आधार पर दिया जाता है।
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यह सिद्धांत किसी विशिष्ट कानून में परिभाषित नहीं है, लेकिन भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 123 से वैधानिक समर्थन प्राप्त करता है।
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आलोचकों के अनुसार यह प्रक्रिया खुले न्यायालय, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे लोकतांत्रिक न्यायिक सिद्धांतों को कमजोर करती है।
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साक्ष्यों तक पहुँच न मिलने से निष्पक्ष सुनवाई और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होता है, खासकर मौलिक अधिकारों से जुड़े मामलों में।
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मीडिया वन, आईएनएक्स मीडिया और पी. गोपालकृष्णन मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
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इन-कैमरा सुनवाई और सीमित सूचना प्रकटीकरण को गोपनीयता व न्यायिक निष्पक्षता के बीच संतुलन का बेहतर विकल्प माना गया है।





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