भारत राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत कांडला में हाइड्रोजन हब विकसित कर स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को तेज कर रहा है, जो 2070 तक नेट-ज़ीरो लक्ष्य की दिशा में अहम कदम है।
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भारत राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत कांडला पोर्ट पर हाइड्रोजन हब विकसित करेगा।
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मिशन का लक्ष्य अगले 5–6 वर्षों में लगभग 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन और निर्यात है।
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यह पहल भारत के 2070 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य का समर्थन करती है।
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केंद्रीय मंत्री सरबानंद सोनोवाल ने ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन मेथनॉल को भविष्य की ऊर्जा बताया।
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परियोजना से कांडला पोर्ट पर गहरे समुद्री जहाजों की आवाजाही और कार्गो ट्रैफिक बढ़ेगा।
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असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड इस परियोजना में प्रमुख भूमिका निभाएगा।
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इससे असम और पूर्वोत्तर भारत की स्वच्छ ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में भागीदारी मजबूत होगी।
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एपीएल पारंपरिक मेथनॉल से ग्रीन और ई-मेथनॉल उत्पादन की ओर आगे बढ़ेगा।
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यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया लक्ष्यों के अनुरूप है।
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हरित सागर – ग्रीन पोर्ट दिशानिर्देश बंदरगाहों के डी-कार्बनाइजेशन को बढ़ावा देते हैं।
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भारत के लगभग 90% व्यापार का परिवहन बंदरगाहों के माध्यम से होता है।





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