अमेरिका द्वारा उदारीकरण और बहुपक्षवाद से हटकर राष्ट्रवाद, संरक्षणवाद और द्विपक्षीय सौदों की ओर झुकाव ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को बदल दिया है। यह बदलाव WTO-आधारित व्यवस्था को चुनौती देता है और भारत जैसे विकासशील देशों के लिए जटिलताएँ बढ़ाता है।
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• वॉशिंगटन कंसेंसस ने LPG मॉडल को बढ़ावा दिया
• US का NPB मॉडल: राष्ट्रवाद, संरक्षणवाद, द्विपक्षीय व्यापार का उभार
• 1933 के बाद सबसे ऊँचे टैरिफ; सुरक्षा के नाम पर कई उद्योग संरक्षित
• संरक्षणवाद से नवाचार घटा; US EV और टेक सेक्टर में वैश्विक प्रतिस्पर्धा कम
• US व्यापार घाटे को अनुचित व्यापार मानता; भारतीय श्रिम्प और निर्यात निशाने पर
• 2025 में $195B टैरिफ; सोलर पैनल शुल्क से अमेरिकी उपभोक्ताओं पर बोझ
• ‘डि मिनिमिस’ हटने से MSMEs प्रभावित; भारतीय शिल्पकारों की लागत बढ़ी
• श्रम संरक्षणवाद: H-1B में कड़ाई, ICE छापों से विदेशी टैलेंट प्रभावित
• द्विपक्षीयता ने WTO की MFN व्यवस्था को कमजोर किया; राजनीति अब बाज़ार की शर्त
• NPB वैश्विक स्तर पर फैला—EU की ‘स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी’, चीन की ‘डुअल सर्कुलेशन’
• IMF चेतावनी: विकास धीमा, गरीबी बढ़ने का खतरा
• भारत के लिए सलाह: 1970s जैसे अलगाववाद से बचकर नए सहयोग ढाँचे बनाना





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