8 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के “करो या मरो” आह्वान के बाद भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ। कठोर दमन और नेताओं की गिरफ्तारी के बावजूद यह जनता-आधारित विद्रोह स्वतंत्रता संघर्ष का निर्णायक मोड़ बना।
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- 8 अगस्त 1942 को गांधीजी के “करो या मरो” के साथ शुरुआत
- शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी से आंदोलन नेतृत्वविहीन → जन-नेतृत्व
- ब्रिटिश दमन: 1 लाख+ गिरफ्तार, कांग्रेस पर प्रतिबंध
- तेज़ राष्ट्रीय फैलाव: छात्र, किसान, मजदूर बड़े पैमानों पर शामिल
- भूमिगत रेडियो, sabotage, समानांतर सरकारें सक्रिय
- प्रमुख नेता: अरुणा आसफ़ अली, जेपी, लोहिया, उषा मेहता, बिजू पटनायक
- कारण: क्रिप्स मिशन विफलता, युद्धकालीन संकट, बढ़ता राष्ट्रवाद
- तीन चरण: शहरी हड़तालें → ग्रामीण तोड़फोड़ → समानांतर शासन
- एकता, महिलाओं की भागीदारी और स्वतंत्रता की मांग मजबूत
- आंदोलन ने ब्रिटिश शासन को स्पष्ट किया कि स्वतंत्रता अवश्यंभावी





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