एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के Institute for Design Informatics के अध्ययन से खुलासा हुआ है कि संयुक्त राष्ट्र की जलवायु सम्मेलनों (COP) की वेबसाइटें — जैसे COP30 (ब्राजील, 2025) — सामान्य वेबसाइटों की तुलना में सात गुना अधिक कार्बन उत्सर्जन करती हैं। अध्ययन ने चेताया कि जलवायु संरक्षण पर बात करने वाले डिजिटल मंच खुद पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहे हैं।
BulletsIn
- 1995 से COP वेबसाइटों का कार्बन उत्सर्जन 13,000% बढ़ा
- COP30 वेबसाइट नवीकरणीय ऊर्जा पर होस्ट नहीं की गई
- औसत COP पेज प्रति विजिट 2.4 ग्राम CO₂ छोड़ता, सामान्य साइट सिर्फ 0.36 ग्राम
- इंटरनेट उपयोग अब वैश्विक ग्रीनहाउस गैसों का लगभग 3%
- COP1 से COP29 तक उत्सर्जन 0.14 किलोग्राम से बढ़कर 116.85 किलोग्राम प्रति पेज व्यू
- यह मात्रा 10 पेड़ों के सालभर के अवशोषण के बराबर
- भारी मल्टीमीडिया, लाइव स्ट्रीम और इंटरैक्टिव टूल्स से कार्बन बढ़ा
- 30 वर्षों के डिजिटल उत्सर्जन का वेब आर्काइव डेटा से पहला विश्लेषण
- विशेषज्ञों ने डिजिटल स्थिरता को जलवायु नीति में शामिल करने की अपील की
- “डिजिटल उपस्थिति की भी कीमत है,” प्रोफेसर मेलिसा टेरास ने कहा, हरित वेब डिज़ाइन की मांग की





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