दिसंबर 1916 में लखनऊ में हुई Lucknow Pact में Indian National Congress और All‑India Muslim League ने एकजुट होकर ब्रिटिश शासन से भारतीय स्व-शासन की माँग की और मुस्लिमों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया। यह समझौता संवैधानिक सुधारों व सांप्रदायिक चिंताओं से उपजा था।
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- 1916 में कांग्रेस व मुस्लिम लीग ने पहली बार मिलकर राजनीतिक व संवैधानिक सुधार की माँग रखी।
- प्रदेश एवं केन्द्रीय विधानसभाओं में निर्वाचित सदस्यों की संख्या बढ़ाने का वादा किया गया।
- मुस्लिमों को अलग निर्वाचन क्षेत्र (सेपरेट इलेक्टोरेट) व जनसंख्या से अधिक वज़न दिया गया।
- कार्यकारी परिषदों में कम-से-कम आधे सदस्य भारतीय हों और विधानसभाओं में निर्वाचित बहुमत हो।
- विधायी परिषदों की अवधि पाँच साल तय की गई; ब्रिटिश को सचिवालय वेतन ब्रिटिश कोष से देना होगा।
- यह हिन्दू-मुस्लिम सहयोग का शिखर माना गया पूर्व-स्वतंत्रता भारत में।
- इस संधि ने बाद में आने वाले आम जनता आंदोलनों- जैसे असहयोग व हथकट्टा-के लिए आधार तैयार किया।
- दूसरी ओर, अलग निर्वाचन क्षेत्रों की स्वीकृति ने भारत में सांप्रदायिक राजनीति को वैध रूप दिया।
- कांग्रेस ने 29 दिसंबर और मुस्लिम लीग ने 31 दिसंबर 1916 को इसे अपनाया।





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