स्वामी दयानंद सरस्वती ने 10 अप्रैल 1875 को बॉम्बे (मुंबई) में आर्य समाज की स्थापना की। इसका उद्देश्य वैदिक सिद्धांतों पर आधारित एक शुद्ध, समान और शिक्षित समाज का निर्माण था।
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- 1875 में स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा बॉम्बे में स्थापना।
- वैदिक धर्म की पुनः स्थापना और मूर्तिपूजा, अंधविश्वास का विरोध।
- एक निराकार, सर्वशक्तिमान ईश्वर की उपासना पर जोर।
- जातिवाद, सती प्रथा, बाल विवाह और बहुपत्नी प्रथा का विरोध।
- विधवा पुनर्विवाह, महिला शिक्षा और समानता का समर्थन।
- संस्कृत और हिन्दी के प्रचार तथा डी.ए.वी. स्कूल-कॉलेजों की स्थापना।
- शुद्धि आंदोलन चलाकर अन्य धर्मों से लौटे लोगों को हिंदू समाज में शामिल किया।
- 1882 में गौ रक्षा सभा की स्थापना से भारतीय परंपराओं की रक्षा की।
- प्राकृतिक आपदाओं में मानवता सेवा और राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहन दिया।
- भारतीय समाज को आत्मगौरव, शिक्षा और स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा दी।





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