भारत की अदालतों में लंबित मामलों में लगभग आधे सरकारी मुकदमे हैं। 2010 की राष्ट्रीय मुकदमेबाज़ी नीति (NLP) का उद्देश्य सरकार को “जिम्मेदार वादी” बनाना था, लेकिन अस्पष्ट प्रावधानों और कमजोर क्रियान्वयन के कारण यह नीति विफल रही। विशेषज्ञ अब इसकी समीक्षा की माँग कर रहे हैं ताकि जवाबदेही और न्याय प्रणाली में दक्षता सुनिश्चित हो सके।
- कुल लंबित मामलों में लगभग 50% में सरकार पक्षकार।
- देशभर में 3 करोड़ से अधिक मामले लंबित, बड़ी संख्या सरकारी मुकदमों की।
- सरकारी मुकदमों की वास्तविक संख्या पर कोई आधिकारिक डेटा नहीं।
- सर्वोच्च न्यायालय 1970 के दशक से सरकारी यांत्रिक मुकदमेबाज़ी की आलोचना कर रहा है।
- सरकार अपने दायर 90% से अधिक मामलों में हार जाती है।
- कई मुकदमे सरकारी विभागों के बीच के विवाद हैं।
- 2010 की राष्ट्रीय मुकदमेबाज़ी नीति का लक्ष्य — “जिम्मेदार और कुशल वादी” बनाना।
- नीति विफल — अस्पष्ट भाषा, जवाबदेही और निगरानी प्रणाली का अभाव।
- Empowered Committees की भूमिका अस्पष्ट और पारदर्शिता रहित।
- विशेषज्ञ नई नीति में स्पष्ट लक्ष्य, जवाबदेही और नियमित समीक्षा की माँग कर रहे हैं।





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