एक नए अध्ययन ने चेतावनी दी है कि जलवायु संकट पर देर से कदम उठाने की तुलना में समय रहते लचीलापन बढ़ाना सस्ता है। भारत, जो बार-बार चरम मौसम से प्रभावित हो रहा है, सबसे बड़े खतरे का सामना कर रहा है।
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- अध्ययन: लचीलापन निवेश आपदा से उबरने की लागत से सस्ता
- शोध नेतृत्व: एंड्रिया टिटन, एम्स्टर्डम विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री
- जलवायु मॉडल ने आपदाओं व सप्लाई चेन पर असर का आकलन किया
- आपूर्ति विविधीकरण भी नाकाफी, कोई क्षेत्र सुरक्षित नहीं
- भारत लगातार झेल रहा है लू, भारी बारिश, बाढ़
- विश्व बैंक: 2030 तक भारत का 5% GDP घट सकता है
- पंजाब समेत कृषि राज्यों में फसल व घर नष्ट हुए
- जनसंख्या के कारण भारत संकट की अग्रिम पंक्ति पर
- वैश्विक नुकसान 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकता है
- छोटी नीतिगत गलतियाँ भी भारी पड़ेंगी, चेतावनी दी गई





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