भारतीय संविधान के अनुच्छेद 168 से 177 तक राज्य विधानमंडलों की संरचना, गठन, अधिकार और अवधि से संबंधित प्रावधान हैं। ये अनुच्छेद राज्य विधानसभा और विधान परिषद के निर्माण, समाप्ति, कार्यप्रणाली और सदस्यता की शर्तों का मार्गदर्शन करते हैं।
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- हर राज्य में एक या दो सदनों वाला विधानमंडल होता है
- दो सदन वाले राज्य: आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर
- विधान परिषद का गठन/समाप्ति राज्य की विधानसभा के प्रस्ताव पर संसद द्वारा हो सकता है
- विधानसभा में 60 से 500 सदस्य होते हैं, जो सीधे चुने जाते हैं
- 2026 के बाद पहली जनगणना के आंकड़े प्रकाशित होने तक सीटों में बदलाव नहीं होगा
- विधान परिषद की सदस्य संख्या विधानसभा की एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती, न्यूनतम 40 सदस्य जरूरी
- परिषद के सदस्य स्थानीय निकायों, स्नातकों, शिक्षकों, विधायकों व राज्यपाल द्वारा नामित होते हैं
- विधानसभा की अवधि 5 वर्ष; परिषद स्थायी, हर दो वर्ष में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त
- राज्यपाल को सदनों को संबोधित करने व संदेश भेजने का अधिकार है; वार्षिक प्रारंभिक सत्र में विशेष संबोधन भी
- मंत्री और महाधिवक्ता को दोनों सदनों में बोलने का अधिकार है, मतदान का नहीं





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