चोल वंश दक्षिण भारत में तमिल भाषी शासकों का एक शक्तिशाली साम्राज्य था, जो कई सदियों तक फला-फूला। संगम युग में इसकी शुरुआत हुई और 9वीं से 13वीं सदी के बीच इसका चरम रहा। चोलों ने प्रशासन, सेना, कला, स्थापत्य, साहित्य और समुद्री व्यापार में बड़ी उपलब्धियाँ हासिल कीं।
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- भारत के इतिहास का सबसे लंबे समय तक शासन करने वाला वंश
- मुख्य क्षेत्र: कावेरी नदी घाटी, तमिलनाडु, आंध्र, कर्नाटक, केरल के हिस्से
- संस्थापक: विजयालय चोल, 9वीं सदी में शुरू हुआ साम्राज्य
- प्रमुख शासक: राजराजा I और राजेन्द्र I; थल व समुद्री विजय अभियान चलाए
- साम्राज्य की सीमाएँ गोदावरी से मालदीव, बंगाल से श्रीलंका तक फैलीं
- ग्राम पंचायतों में “कुडवोलै” प्रणाली से चुनाव होते थे
- भूमि सर्वे आधारित कर प्रणाली; पैदावार का एक-तिहाई कर लिया जाता था
- चोलों की नौसेना ने बंगाल की खाड़ी में दबदबा बनाया; व्यापार फलता-फूलता रहा
- प्रसिद्ध मंदिर स्थापत्य: बृहदेश्वर, गंगैकोंडचोलपुरम, दारासुरम
- तमिल साहित्य समृद्ध: कंब रामायण, पेरियापुराणम, मुवरुला





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