इतिहास में ज्वालामुखियों ने कई तबाही मचाई है। इन विस्फोटों ने न केवल शहरों को मिटा दिया, बल्कि जलवायु को भी बदल दिया। जानिए चार सबसे भयावह ज्वालामुखी विस्फोटों के बारे में।
BulletsIn
- क्राकाटोआ (इंडोनेशिया, 1883): द्वीप नष्ट, 131 फीट ऊँची सुनामी, ~36,000 मौतें
- तंबोरा (इंडोनेशिया, 1815): सबसे शक्तिशाली विस्फोट, ~100,000 कुल मौतें
- तंबोरा विस्फोट ने “बिना गर्मी का साल” लाया, फसलें नष्ट, अकाल, बीमारियाँ फैलीं
- माउंट पेली (मार्टिनिक, 1902): सेंट पियरे शहर तबाह, ~28,000 मौतें, कुछ ही बचे
- वेसुवियस (इटली, 79 ई.): पोम्पेई-हेरकुलेनियम राख में दबे, हजारों मरे
- वेसुवियस की राख 32 किमी ऊपर गई, भीषण गर्मी से सब नष्ट
- विस्फोट जलवायु पर असर डालते हैं, बीमारी, भुखमरी और पलायन को जन्म देते
- ज्वालामुखी गैस और राख से पर्यावरण को दीर्घकालिक नुकसान
- सक्रिय ज्वालामुखी फिर फट सकते हैं, सुप्त भी खतरे से खाली नहीं
- जान-माल बचाने के लिए निगरानी और चेतावनी तंत्र जरूरी





What do you think?
It is nice to know your opinion. Leave a comment.