दिल्ली सल्तनत की प्रशासनिक व्यवस्था केंद्रीकृत थी, जिसमें सुलतान शीर्ष सत्ता रखते थे। सुलतान को सैन्य प्रमुख के रूप में भी पूर्ण अधिकार प्राप्त था, और राजधानी क्षेत्र उनके प्रशासन के तहत था। सुलतान की प्रशासनिक व्यवस्था व्यापार, शहरीकरण और स्थापत्य विकास को बढ़ावा देती थी। गुलाम वंश के शासकों ने कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद और कुतुब मीनार जैसी ऐतिहासिक इमारतें बनाई थीं, जो उनकी स्थापत्य कला का परिचय देती हैं।
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- दिल्ली सल्तनत में सुलतान सर्वोच्च अधिकारी होते थे और क्षेत्र की पूर्ण शक्ति उनके हाथों में होती थी।
- सुलतान सेना के सर्वोच्च सेनापति होते थे और प्रशासन की पूरी जिम्मेदारी उनके ऊपर होती थी।
- राजधानी और आस-पास के क्षेत्र केंद्रीय प्रशासन के सीधे नियंत्रण में होते थे।
- ये क्षेत्र शासक वर्ग, व्यापार और शहरीकरण के लिए महत्वपूर्ण थे।
- शासक वर्ग की शोषणकारी प्रकृति के कारण संसाधनों का प्रबंधन साम्राज्य के अन्य क्षेत्रों से किया जाता था।
- कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद, जो कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा 1192 और 1198 के बीच बनाई गई, भारत की सबसे प्रारंभिक मस्जिदों में से एक है।
- कुतुब मीनार, जो भारत की सबसे ऊंची मीनार है, कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा 1199 में शुरू की गई थी और शम्सुद्दीन इल्तुतमिश द्वारा तीन मंजिलों के साथ पूरी की गई।
- कुतुब मीनार पर अरबी और नागरी लिपियों में शिलालेख हैं, और लौह स्तंभ पर संस्कृत में शिलालेख है।
- अढ़ाई दिन का झोपड़ा, जिसे “ढाई दिन की मस्जिद” भी कहा जाता है, अजमेर, राजस्थान में 1199 में कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा बनवाया गया।
- सुलतान गढ़ का मकबरा, जो कुतुब मीनार से 6 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है, इल्तुतमिश ने 1231 में नासिरुद्दीन महमूद के अवशेषों पर बनवाया।
- शम्सुद्दीन इल्तुतमिश का मकबरा, जो कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद के उत्तर-पश्चिम में स्थित है, इल्तुतमिश ने 1235 में बनवाया।
- गयासुद्दीन बलबन का मकबरा महरौली, नई दिल्ली में स्थित है, जिसे 1287 में बनवाया गया।





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