भारत ने फिलहाल अपने जलवायु लक्ष्यों (NDCs) को संशोधित नहीं करने का फैसला किया है, क्योंकि इनका अद्यतन संस्करण अभी तैयार किया जा रहा है। यह निर्णय COP29 में जलवायु वित्त पोषण सौदे को अपर्याप्त मानने के बाद लिया गया, जिसे भारत सहित कई विकासशील देशों ने अस्वीकार किया।
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- भारत ने संयुक्त राष्ट्र की समय-सीमा तक अद्यतन जलवायु लक्ष्य (NDC) प्रस्तुत नहीं किया।
- COP29 सम्मेलन (बаку) में समृद्ध देशों ने 2035 तक जलवायु वित्त के लिए $300 बिलियन प्रतिवर्ष देने का वादा किया।
- भारतीय वार्ताकार चांदनी रैना ने इसे “नगण्य” बताते हुए प्रभावी जलवायु कार्रवाई के लिए अपर्याप्त कहा।
- भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा प्रदूषक है, लेकिन स्वच्छ ऊर्जा में निवेश बढ़ा रहा है।
- भारत की ऊर्जा जरूरतें अभी भी मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधनों पर निर्भर हैं, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा केवल 2% है।
- भारत का वर्तमान लक्ष्य: 2005 के स्तर की तुलना में 2030 तक उत्सर्जन तीव्रता में 45% की कमी।
- 2030 तक भारत की आधी बिजली गैर-जीवाश्म ईंधनों से उत्पन्न करने का लक्ष्य।
- जलवायु कार्रवाई ट्रैकर के अनुसार, भारत को वैश्विक तापमान नियंत्रण के लिए 68% उत्सर्जन कटौती की जरूरत।
- भारत 2070 तक कार्बन न्यूट्रल बनने की योजना बना रहा है, जिसके लिए $12.4 ट्रिलियन विदेशी निवेश की आवश्यकता है।
- पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि जलवायु लक्ष्यों की पूर्ति अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मदद पर निर्भर करेगी।





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