भारत का विस्तारित डिजिटल सार्वजनिक ढांचा और परस्पर जुड़ी भुगतान व्यवस्था वित्तीय समावेशन, नवाचार तथा तकनीक आधारित वित्तीय सेवाओं को तेजी दे रही है।
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- सातवें वैश्विक वित्तीय तकनीक महोत्सव का आयोजन 8 से 11 सितंबर तक मुंबई में हो रहा है, जिसमें वित्तीय तकनीकों के भविष्य पर चर्चा होगी।
- महोत्सव में स्वचालित कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सांकेतीकरण और क्वांटम तकनीक पर ध्यान दिया जा रहा है, जो वित्तीय सेवाओं को बदलने में सक्षम हैं।
- 26 अगस्त 2026 तक 59.15 करोड़ जन धन खाते खोले जा चुके थे, जबकि मार्च 2026 तक आधार पंजीकरण 144 करोड़ से अधिक हो चुके थे।
- अगस्त 2026 में यूपीआई ने 2,450.9 करोड़ लेनदेन दर्ज किए और 741 बैंक देश की परस्पर जुड़ी डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़े थे।
- जुलाई 2026 में यूपीआई पर 2,365.8 करोड़ लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य 29.88 लाख करोड़ रुपये रहा, जो व्यापक डिजिटल भुगतान क्षमता दर्शाता है।
- 29 जून 2026 तक आधार आधारित इलेक्ट्रॉनिक ग्राहक पहचान प्रक्रिया में 2,458 करोड़ से अधिक लेनदेन दर्ज किए गए, जिससे वित्तीय पहुंच मजबूत हुई।
- डिजीलॉकर के पंजीकृत उपयोगकर्ताओं की संख्या 73.53 करोड़ से अधिक हुई और इसके माध्यम से 936.03 करोड़ दस्तावेज जारी किए गए।
- सितंबर 2026 तक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की संचयी राशि 53.26 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जिससे डिजिटल माध्यम से सहायता वितरण मजबूत हुआ।
- जून 2026 तक डिजिटल वाणिज्य के खुले नेटवर्क पर 20 करोड़ से अधिक खरीदार और 5 लाख विक्रेता 1,000 से अधिक शहरों में जुड़े थे।
- नियामकीय व्यवस्था में भारतीय रिजर्व बैंक की स्वनियामक संस्था व्यवस्था, डिजिटल भुगतान सुरक्षा नियंत्रण, व्यक्तिगत आंकड़ा संरक्षण कानून और नियामकीय परीक्षण व्यवस्था शामिल हैं।
- वित्तीय तकनीक क्षेत्र के अगले चरण में तकनीकी आत्मनिर्भरता, सुरक्षित नवाचार और समावेशी डिजिटल वित्त को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में देखा जा रहा है।
- भारत का वित्तीय तकनीक तंत्र डिजिटल पहचान, भुगतान, सार्वजनिक ढांचे और तकनीक आधारित सेवाओं के माध्यम से वैश्विक वित्तीय तकनीक केंद्र के रूप में मजबूत हो रहा है।





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