रक्षा अनुसंधान संगठन और हैदराबाद विश्वविद्यालय ने बीएएम-एच24 का पेटेंट कराया, जो अगली पीढ़ी के ठोस रॉकेट प्रणोदन में उपयोगी हो सकता है।
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- रक्षा अनुसंधान संगठन और हैदराबाद विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने बीएएम-एच24 नामक नई उच्च ऊर्जा सामग्री के लिए पेटेंट प्राप्त किया है।
- बीएएम-एच24 में बोरॉन, हाइड्रोजन और नाइट्रोजन शामिल हैं तथा इसका विकास उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान केंद्र में किए गए अनुसंधान से हुआ है।
- पेटेंट में बीएएम-एच24 के निर्माण, संरचना और ऊर्जा संबंधी विशेषताओं को शामिल किया गया है, जो उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान में प्रगति दर्शाता है।
- बीएएम-एच24 में उच्च ऊर्जा क्षमता के साथ मजबूत रासायनिक और तापीय स्थिरता तथा आघात और घर्षण के प्रति प्रतिरोध पाया जाता है।
- इसकी स्थिरता और नमी को कम ग्रहण करने की क्षमता उच्च ऊर्जा सामग्री के निर्माण, परिवहन और भंडारण में महत्वपूर्ण लाभ दे सकती है।
- वैज्ञानिकों के अनुसार उपयुक्त ठोस प्रणोदन प्रणालियों में बीएएम-एच24 अधिक विशिष्ट आवेग और कम प्रज्वलन विलंब प्रदान कर सकता है।
- अधिक विशिष्ट आवेग रॉकेट प्रणोदन की दक्षता बढ़ा सकता है, जबकि कम प्रज्वलन विलंब प्रणोदक के अधिक त्वरित प्रज्वलन में सहायक हो सकता है।
- यह पेटेंट रक्षा अनुसंधान संस्थानों और शैक्षणिक केंद्रों के बीच उन्नत स्वदेशी रक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी विकास में बढ़ते सहयोग को दर्शाता है।
- बेहतर ऊर्जा क्षमता और सुरक्षित संचालन वाली उच्च ऊर्जा सामग्री अधिक सुरक्षित तथा प्रभावी उन्नत प्रणोदन प्रणालियों के विकास में रणनीतिक महत्व रखती है।
- यह तकनीक निर्माण और रसद प्रक्रियाओं की सुरक्षा बढ़ाने के साथ भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में योगदान दे सकती है।
- यह सहयोग दर्शाता है कि रसायन और सामग्री अनुसंधान में शैक्षणिक विशेषज्ञता रक्षा संस्थानों की प्रणोदन विकास क्षमताओं को मजबूत कर सकती है।
- रक्षा अनुसंधान संगठन और हैदराबाद विश्वविद्यालय की साझेदारी स्वदेशी उच्च ऊर्जा सामग्री तथा भविष्य की रक्षा प्रौद्योगिकियों में शिक्षा जगत की बढ़ती भूमिका दर्शाती है।




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