लोकसभा ने उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश संख्या संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर उच्चतम न्यायालय में स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने का प्रस्ताव स्वीकार किया है। इसका उद्देश्य न्यायिक क्षमता बढ़ाना तथा लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण को सुनिश्चित करना है।
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- लोकसभा ने 3 अगस्त 2026 को उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश संख्या संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी, जिसमें भारत के प्रधान न्यायाधीश भी शामिल हैं।
- यह विधेयक 20 जुलाई 2026 को केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा प्रस्तुत किया गया था तथा इसे मई 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति प्राप्त हुई थी।
- यह विधेयक उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश संख्या संशोधन अध्यादेश, 2026 का स्थान लेगा, जिसके माध्यम से पहले न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की गई थी, जिसमें प्रधान न्यायाधीश शामिल नहीं थे।
- न्यायालय में बढ़ते लंबित मामलों तथा संवैधानिक, दीवानी, आपराधिक और विशेष अनुमति याचिकाओं के प्रभावी निस्तारण के लिए न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
- 1 जनवरी 2026 तक उच्चतम न्यायालय में 92,101 मामले लंबित थे, जिससे न्यायिक क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता स्पष्ट हुई।
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 124 संसद को कानून बनाकर उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या निर्धारित करने का अधिकार प्रदान करता है।
- इससे पहले 2019 में संशोधन कर न्यायाधीशों की कुल स्वीकृत संख्या 34 की गई थी, जिसमें भारत के प्रधान न्यायाधीश शामिल थे।
- यह संशोधन न्यायिक दक्षता बढ़ाने, लंबित मामलों का बोझ कम करने तथा उच्चतम न्यायालय की कार्यक्षमता को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





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