संघ सरकार ने 3 दिसंबर 2024 को लोकसभा में बताया कि SC/ST (अत्याचारों की रोकथाम) अधिनियम के तहत मामलों की बढ़ती संख्या का कारण जागरूकता, व्यापक प्रचार और पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण में सुधार है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि 2022 में 67,000 से अधिक मामले दर्ज हुए, जो 2013 के बाद सबसे अधिक हैं। सरकार SC और ST समुदायों के खिलाफ भेदभाव को कम करने के लिए कदम उठा रही है।
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- संघ सरकार ने SC/ST एक्ट के तहत मामलों की बढ़ोतरी को जागरूकता और पुलिस प्रशिक्षण में सुधार से जोड़ा।
- 2022 में SC/ST एक्ट के तहत 67,000 से अधिक मामले दर्ज हुए, जो 2013 के बाद सबसे अधिक हैं।
- NCRB डेटा के अनुसार, 57,582 मामले SC समुदायों और 10,064 मामले ST समुदायों से संबंधित हैं।
- सामाजिक न्याय मंत्री वीरेंद्र कुमार ने सांसद आलोक कुमार सुमन के प्रश्न के उत्तर में डेटा प्रस्तुत किया।
- सरकार SC/ST समुदायों के खिलाफ भेदभाव को कम करने के लिए कानून लागू करने के उपाय कर रही है।
- केंद्रीय विश्वविद्यालयों में भेदभाव पर कोई केंद्रीकृत डेटा उपलब्ध नहीं है।
- सरकार ने SC/ST सेल और समान अवसर सेल स्थापित किए हैं ताकि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में भेदभाव को कम किया जा सके।
- नागरिक अधिकारों के संरक्षण अधिनियम (1955) और SC/ST एक्ट (1989) SC/ST समुदायों को भेदभाव से बचाते हैं।
- अत्याचारों के खिलाफ एक राष्ट्रीय हेल्पलाइन और केंद्रीय योजनाएं इन कानूनों को लागू करने के लिए हैं।
- राष्ट्रीय आयोग SC/ST समुदायों के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक अधिकारों की रक्षा करता है।





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