भारत का वाणिज्यिक एवं औद्योगिक ऊर्जा भंडारण क्षेत्र 2032 तक तेज़ी से विस्तार करने की ओर अग्रसर है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा, बढ़ती बिजली लागत और विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति प्रमुख कारक बन रहे हैं।
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- भारत की वाणिज्यिक एवं औद्योगिक ऊर्जा भंडारण क्षमता 2025 में 1 GWh से कम स्तर से बढ़कर 2032 तक 22-31 GWh तक पहुंचने का अनुमान है।
- इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस के अनुसार बढ़ते विद्युत शुल्क और स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की प्रवृत्ति इस क्षेत्र में निवेश को गति दे रही है।
- ऊर्जा भंडारण बाजार पारंपरिक बैकअप उपयोग से आगे बढ़कर ऊर्जा अनुकूलन, लचीलापन, लागत नियंत्रण और बेहतर विद्युत प्रबंधन की दिशा में विकसित हो रहा है।
- सामान्य प्रगति पर आधारित परिदृश्य के तहत 2032 तक वाणिज्यिक एवं औद्योगिक ऊर्जा भंडारण क्षमता लगभग 22-23 GWh तक पहुंच सकती है।
- तीव्र अपनाने वाले परिदृश्य में अनुकूल नीतियों, नियामक सुधारों और बैटरी लागत में कमी के कारण क्षमता 31 GWh तक पहुंच सकती है।
- उद्योग जगत ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को छत आधारित सौर ऊर्जा, मुक्त पहुंच नवीकरणीय परियोजनाओं तथा डीजल जनरेटर विकल्पों के साथ जोड़ रहा है।
- अध्ययन में लिथियम-आयन, सोडियम-आयन, सीसा-अम्ल, वैनेडियम-रेडॉक्स फ्लो बैटरियों तथा पंप्ड हाइड्रो जैसी विभिन्न तकनीकों का उल्लेख किया गया है।
- इस रिपोर्ट को 8-10 जुलाई 2026 के दौरान नई दिल्ली में आयोजित 12वें इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक में प्रस्तुत किया जाएगा।





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