वैश्विक पर्यावरण सुविधा समर्थित नई परियोजना के तहत उत्तराखंड, नागालैंड और त्रिपुरा में 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सामुदायिक वनों के संरक्षण, मानचित्रण और स्थानीय भागीदारी आधारित प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाएगा।
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- वैश्विक पर्यावरण सुविधा की स्वीकृति के बाद राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण उत्तराखंड, नागालैंड और त्रिपुरा में सामुदायिक वन प्रबंधन की नई परियोजना लागू करेगा।
- परियोजना के अंतर्गत लगभग 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सामुदायिक वनों, पवित्र उपवनों और संरक्षित क्षेत्रों के आसपास स्थित वन क्षेत्रों की पहचान, मानचित्रण और प्रबंधन किया जाएगा।
- इस पहल में 25,000 से अधिक लोगों की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें कम से कम 50 प्रतिशत महिलाएं शामिल होंगी।
- ग्राम परिषदों और राज्य जैव विविधता प्राधिकरणों के सहयोग से स्थानीय समुदाय वन प्रबंधन नियमों और संरक्षण योजनाओं के निर्माण में सह-भागीदार बनेंगे।
- परियोजना का उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान के उपयोग से होने वाले व्यावसायिक लाभों में स्थानीय समुदायों की उचित भागीदारी सुनिश्चित करना तथा लाभ साझा करने की व्यवस्था को मजबूत बनाना है।
- लाभ साझाकरण व्यवस्था के अंतर्गत महिलाओं और महिला नेतृत्व वाले समूहों को प्राप्त होने वाले आर्थिक लाभ का न्यूनतम 40 प्रतिशत हिस्सा सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- प्रस्तावित योजना के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत जैव विविधता मानचित्र तैयार करने और भविष्य की विकास परियोजनाओं में पर्यावरणीय निर्णयों को अधिक वैज्ञानिक बनाने की भी योजना है।
- अनुमान है कि यह पहल अगले 20 वर्षों में लगभग 12 मिलियन मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य उत्सर्जन में कमी या अवशोषण में योगदान दे सकती है, हालांकि जलवायु परिवर्तन संबंधी जोखिमों पर और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता भी बताई गई है।





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