राजस्थान का ऐतिहासिक कुंभलगढ़ दुर्ग वैश्विक चर्चा में आ गया है, क्योंकि यूनेस्को ने इसकी 36 किलोमीटर लंबी प्राचीर को चीन की महान दीवार के बाद विश्व की दूसरी सबसे लंबी अखंड दीवार माना है।
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- यूनेस्को ने राजस्थान स्थित कुंभलगढ़ दुर्ग की प्राचीर को चीन की महान दीवार के बाद विश्व की दूसरी सबसे लंबी अखंड दीवार के रूप में मान्यता दी है।
- कुंभलगढ़ दुर्ग राजस्थान के राजसमंद जिले में अरावली पर्वतमाला के बीच स्थित है।
- इस ऐतिहासिक दुर्ग का निर्माण मेवाड़ के शासक राणा कुंभा ने 1443 से 1458 के बीच करवाया था।
- प्रसिद्ध वास्तुकार मंडन ने इस दुर्ग की रचना उन्नत राजपूत सैन्य स्थापत्य और पर्वतीय सुरक्षा तकनीकों के आधार पर की थी।
- कुंभलगढ़ दुर्ग की विशाल प्राचीर लगभग 36 किलोमीटर तक पहाड़ों, जंगलों और घाटियों में फैली हुई है।
- इस प्राचीर की चौड़ाई लगभग 15 से 25 फुट बताई जाती है और मान्यता है कि इस पर एक साथ 8 घोड़े चल सकते थे।
- दुर्ग की सुरक्षा के लिए इसमें 7 विशाल द्वार, प्रहरी मीनारें, सुरक्षा बुर्ज और तीर चलाने हेतु विशेष छिद्र बनाए गए थे।
- कुंभलगढ़ दुर्ग को वर्ष 2013 में यूनेस्को की राजस्थान के पर्वतीय दुर्ग विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था।
- दुर्ग परिसर में 360 से अधिक प्राचीन मंदिर मौजूद हैं, जिनमें लगभग 300 जैन मंदिर और अनेक हिंदू मंदिर शामिल हैं।
- नीलकंठ महादेव मंदिर और बादल महल दुर्ग के सबसे प्रसिद्ध आकर्षणों में गिने जाते हैं।
- कुंभलगढ़ दुर्ग महान राजपूत योद्धा महाराणा प्रताप की जन्मस्थली के रूप में भी ऐतिहासिक महत्व रखता है।





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