National Company Law Appellate Tribunal ने कहा कि National Company Law Tribunal सीधे SFIO जांच का आदेश नहीं दे सकता और यह अधिकार केंद्र सरकार के पास है।
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- NCLAT ने स्पष्ट किया कि NCLT सीधे SFIO जांच का आदेश नहीं दे सकता।
- ट्रिब्यूनल ने कहा कि SFIO जांच का अधिकार केंद्र सरकार के पास है।
- मामले को आगे की कार्रवाई के लिए कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय को भेजा गया।
- अब जांच Companies Act के तहत इंस्पेक्टरों के माध्यम से हो सकती है।
- NCLAT ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए NCLT आदेश में बदलाव किया।
- ट्रिब्यूनल ने Companies Act की धारा 212 और 213 का उल्लेख किया।
- फैसले में कहा गया कि SFIO जांच से पहले कानूनी प्रक्रिया जरूरी है।
- NCLAT ने इस मामले में पुराने न्यायिक फैसलों का भी हवाला दिया।
- ट्रिब्यूनल ने कथित धोखाधड़ी से जुड़े निष्कर्षों को बरकरार रखा।
- कंपनी के बैलेंस शीट में निवेश बिक्री के बाद भी दिखाए जाने पर सवाल उठे।
- ट्रिब्यूनल ने माना कि इससे लेनदारों को गुमराह किया जा सकता था।
- निलंबित निदेशक बिक्री राशि के ट्रांसफर का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
- दिवाला समाधान प्रक्रिया में सहयोग की कमी भी दर्ज की गई।
- फैसले ने ट्रिब्यूनल और केंद्र सरकार की शक्तियों के बीच अंतर स्पष्ट किया।





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