भारत हीटवेव नियंत्रण, कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और जलवायु सुरक्षा उपायों के लिए केंद्र और राज्यों की संयुक्त फंडिंग व्यवस्था तैयार कर रहा है।
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- भारत आने वाले सप्ताहों में हीटवेव नियंत्रण और जलवायु अनुकूलन के लिए संयुक्त केंद्र-राज्य फंडिंग ढांचा अंतिम रूप दे सकता है।
- यह प्रस्ताव देशभर में बढ़ती अत्यधिक गर्मी, स्वास्थ्य जोखिम और शहरी अवसंरचना पर बढ़ते दबाव के बीच सामने आया है।
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों ने कहा कि केंद्र और राज्य मिलकर आपदा शमन और राहत संसाधनों का उपयोग करेंगे।
- प्रस्तावित ढांचे में राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि, राज्य आपदा शमन निधि और राष्ट्रीय स्तर की आपदा वित्तीय व्यवस्थाओं का उपयोग किया जा सकता है।
- यह पहल वर्ष 2024 के उस निर्णय के बाद आई है जिसमें हीटवेव नियंत्रण के लिए शमन निधियों के उपयोग की अनुमति दी गई थी।
- सोलहवें वित्त आयोग ने भी हीटवेव को औपचारिक रूप से आपदा श्रेणी में शामिल करने की सिफारिश की है।
- अधिकारियों के अनुसार नई नीति का मुख्य उद्देश्य अत्यधिक गर्मी के स्रोतों को कम करना और कूलिंग समाधान विकसित करना है।
- प्रस्तावित व्यवस्था भारत की दीर्घकालिक जलवायु अनुकूलन रणनीति को मजबूत कर सकती है क्योंकि कई राज्यों में हीटवेव घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।





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