श्री नारायण गुरु के नेतृत्व में शुरू हुआ एसएनडीपी आंदोलन केरल में समानता, शिक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय की दिशा में एक निर्णायक सुधार आंदोलन साबित हुआ।
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- एसएनडीपी आंदोलन की शुरुआत 1888 में अरुविप्पुरम आंदोलन के रूप में हुई, जब श्री नारायण गुरु ने सामाजिक और धार्मिक भेदभाव को खुली चुनौती दी।
- शिवलिंग स्थापना के इस ऐतिहासिक कदम ने उस दौर की जातिगत बंदिशों को तोड़ने का प्रतीकात्मक और व्यावहारिक संदेश दिया।
- 1903 में स्थापित श्री नारायण धर्म परिपालना योगम ने एझवा समुदाय के सामाजिक, शैक्षिक और आध्यात्मिक उत्थान को संगठित रूप दिया।
- डॉ. पाल्पु और कुमारन आसन जैसे नेताओं ने आंदोलन को व्यापक आधार दिया और समुदाय के अधिकारों के लिए जन-जागरण का कार्य किया।
- आंदोलन ने शिक्षा को सामाजिक बदलाव का प्रमुख साधन माना और सरकारी स्कूलों तथा रोजगार अवसरों तक समान पहुंच की मांग की।
- महिलाओं की शिक्षा और भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया, जिससे समुदाय में सामाजिक सुधार की प्रक्रिया मजबूत हुई।
- श्री नारायण गुरु का “एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर” का संदेश आंदोलन की वैचारिक आत्मा बना और आज भी सामाजिक समानता का प्रतीक है।





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