हजारीबाग को भारत का पहला मोती खेती क्लस्टर घोषित किया गया है जिससे मत्स्य क्षेत्र में नवाचार और ग्रामीण आजीविका के अवसरों को मजबूती मिली है।
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- हजारीबाग को भारत का पहला मोती खेती क्लस्टर विकसित किया गया है जिसमें केंद्र सरकार और झारखंड सरकार द्वारा लगभग 22 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।
- यह पहल वर्ष 2019-20 में पायलट परियोजना के रूप में शुरू हुई और बाद में प्रशिक्षण उत्पादन प्रसंस्करण तथा विपणन को शामिल करते हुए एक संगठित ढांचे में विकसित हुई।
- मोती खेती क्लस्टर एक ऐसा क्षेत्र होता है जहां उत्पादन प्रशिक्षण मूल्य संवर्धन और बाजार संपर्क को एक साथ विकसित कर आय और उत्पादकता बढ़ाई जाती है।
- रांची स्थित प्रशिक्षण केंद्र में 132 से अधिक किसानों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से मोती उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया जिससे कौशल विकास को बढ़ावा मिला।
- राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड के अनुसार हजारीबाग जिले में 1.02 लाख से अधिक मोतियों का उत्पादन हुआ है जो इस क्षेत्र की तेजी से बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।
- झारखंड राज्य में 800 से अधिक प्रशिक्षित मोती किसान तैयार किए गए हैं जिससे रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायता मिली है।
- इस क्लस्टर में हायरियोप्सिस क्यूमिंगी प्रजाति का उपयोग मोती उत्पादन के लिए किया जाता है और सतत उत्पादन के लिए ब्रूड बैंक स्थापित करने की योजना है।
- यह पहल कौशल विकास मूल्य संवर्धन और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देकर हजारीबाग को भारत में मोती खेती का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।





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