तेभागा आंदोलन 1946 में बंगाल का एक महत्वपूर्ण किसान आंदोलन था जिसमें बटाईदारों ने उपज का दो तिहाई हिस्सा मांगकर जमींदारी शोषण के खिलाफ संघर्ष किया।
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- तेभागा आंदोलन 1946 में बंगाल में शुरू हुआ जिसमें बटाईदारों ने जमींदारों को आधी उपज देने के बजाय केवल एक तिहाई देने की मांग रखी।
- इस आंदोलन का नेतृत्व कम्युनिस्ट पार्टी और किसान संगठनों ने किया जिन्होंने ग्रामीण किसानों को संगठित कर जमींदारी शोषण और औपनिवेशिक नीतियों के खिलाफ संघर्ष कराया।
- बटाईदारों को अपनी उपज का आधा हिस्सा जमींदारों को देना पड़ता था जिससे उनके पास जीवन निर्वाह के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचते थे।
- 1943 के बंगाल अकाल ने किसानों की स्थिति और अधिक खराब कर दी जिससे भूख और मृत्यु बढ़ी तथा जमींदारों के प्रति आक्रोश तेज हुआ।
- फ्लाउड आयोग ने बटाईदारों को उपज का दो तिहाई हिस्सा देने की सिफारिश की जिसने आंदोलन की मांगों को मजबूत आधार प्रदान किया।
- यह आंदोलन दिनाजपुर जलपाईगुड़ी और खुलना जैसे क्षेत्रों में फैला जिसमें किसानों मजदूरों और महिलाओं की व्यापक भागीदारी देखी गई।
- जमींदारों के विरोध और सरकारी दमन के कारण कई स्थानों पर हिंसक संघर्ष हुए जिससे आंदोलन धीरे धीरे कमजोर पड़ गया।
- इस आंदोलन ने भूमि सुधार की दिशा में प्रभाव डाला राजनीतिक जागरूकता बढ़ाई और स्वतंत्रता संग्राम को मजबूत करते हुए भविष्य के किसान आंदोलनों को प्रेरित किया।





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