मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लाए गए महाभियोग नोटिस के बाद संविधान के अनुच्छेद 324 पर फिर से ध्यान गया है। यही अनुच्छेद भारत निर्वाचन आयोग की शक्तियों, कार्यों और स्वतंत्रता का आधार है। यह मुद्दा चुनाव आयोग की स्वायत्तता, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया और हाल के कानूनी बदलावों को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
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- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस ने अनुच्छेद 324 को फिर से प्रमुख संवैधानिक मुद्दा बना दिया है।
अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग को संसद, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों की अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति देता है। - मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए वही सुरक्षा दी गई है जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को प्राप्त होती है, ताकि आयोग की स्वतंत्रता बनी रहे।
- CEC को केवल उन्हीं आधारों और उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के लिए लागू होती है, इसलिए यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण और कठिन है।
- अन्य चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश के बिना नहीं हटाया जा सकता, जिससे आयोग के भीतर भी संस्थागत सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
- यह मुद्दा Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023 को भी महत्वपूर्ण बनाता है, जो नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल से संबंधित है।
- UPSC के लिए यह विषय इसलिए अहम है क्योंकि इसमें संविधान, चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, हटाने की प्रक्रिया और हाल के कानूनी-राजनीतिक घटनाक्रम एक साथ जुड़े हैं।
- अनूप बरनवाल फैसला भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसमें चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया और संस्थागत निष्पक्षता पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणियाँ की थीं।





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