उदारवादी काल भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का प्रारंभिक चरण था जिसमें संवैधानिक सुधार, आर्थिक आलोचना और राष्ट्रीय राजनीतिक चेतना के विकास पर जोर दिया गया।
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- भारत में प्रारंभिक राष्ट्रवाद का उदय ब्रिटिश प्रशासनिक एकीकरण, पाश्चात्य शिक्षा, समाचार पत्रों के प्रसार और औपनिवेशिक नीतियों के विरोध से हुआ।
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना दिसंबर 1885 में बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में हुई और इसके पहले अध्यक्ष डब्ल्यू सी बनर्जी बने।
- कांग्रेस की स्थापना में ए ओ ह्यूम की महत्वपूर्ण भूमिका रही जिससे सेफ्टी वाल्व सिद्धांत और लाइटनिंग कंडक्टर सिद्धांत की चर्चा हुई।
- इस काल के प्रमुख नेता दादाभाई नौरोजी, गोपाल कृष्ण गोखले, सुरेंद्रनाथ बनर्जी, फिरोजशाह मेहता और न्यायमूर्ति महादेव गोविंद रानाडे थे।
- उदारवादी नेताओं ने संवैधानिक मार्ग अपनाया जिसे तीन पी की नीति कहा गया जिसमें प्रार्थना, निवेदन और विरोध शामिल थे।
- उनकी प्रमुख राजनीतिक मांगों में विधान परिषदों का विस्तार, भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा भारत और इंग्लैंड में आयोजित करना और न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करना शामिल था।
- उदारवादी नेताओं का सबसे महत्वपूर्ण योगदान औपनिवेशिक शासन की आर्थिक आलोचना थी जिसमें दादाभाई नौरोजी का धन निकासी सिद्धांत प्रमुख था।
- यद्यपि यह आंदोलन मुख्यतः शिक्षित वर्ग तक सीमित रहा, फिर भी इसने आगे आने वाले जनआंदोलनों के लिए वैचारिक आधार तैयार किया।





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