उच्चतम न्यायालय ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए देशभर में निर्देश जारी करते हुए मृदा संरक्षण और वैज्ञानिक निस्तारण पर बल दिया।
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- उच्चतम न्यायालय ने 1 अप्रैल 2026 से लागू नियमों के सख्त पालन के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी किए।
- न्यायालय ने गीले, सूखे और खतरनाक कचरे के पृथक्करण में कमी को गंभीर चिंता का विषय बताया।
- अनियंत्रित कचरा निस्तारण से मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट, भूजल प्रदूषण और कीटजनित रोगों के प्रसार की आशंका व्यक्त की गई।
- वैज्ञानिक लैंडफिल प्रबंधन और रिसाव नियंत्रण व्यवस्था अपनाने के निर्देश दिए गए ताकि मृदा और पर्यावरण सुरक्षित रह सके।
- जैविक कचरे से खाद निर्माण और विकेंद्रीकृत प्रसंस्करण को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया।
- आधुनिक प्रबंधन में पुनर्चक्रण, स्रोत पर पृथक्करण और कचरे की मात्रा घटाने की रणनीतियों को आवश्यक बताया गया।
- भस्मीकरण और अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन संयंत्रों को प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के साथ अपनाने की आवश्यकता रेखांकित की गई।
- इन निर्देशों का उद्देश्य सतत अपशिष्ट प्रबंधन, मृदा संरक्षण और जनस्वास्थ्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।





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