भारत में आरक्षण एक संवैधानिक नीति है जिसका उद्देश्य सामाजिक न्याय, समान अवसर और पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
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- भारत में आरक्षण व्यवस्था शिक्षा, सरकारी सेवाओं और विधायिकाओं में ऐतिहासिक रूप से वंचित वर्गों को प्रतिनिधित्व प्रदान करने की संवैधानिक व्यवस्था है।
- संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 राज्य को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान बनाने का अधिकार देते हैं।
- केंद्र सरकार की सेवाओं में अनुसूचित जाति को 15 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति को 7.5 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है।
- वर्ष 2019 में 103वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया।
- उच्चतम न्यायालय ने इंद्रा साहनी मामले में जाति आधारित आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत निर्धारित कर संवैधानिक संतुलन बनाए रखा।
- अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को पदोन्नति में भी आरक्षण प्राप्त है तथा इनके लिए मलाईदार परत की व्यवस्था लागू नहीं होती।
- अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण केवल गैर मलाईदार परत के अंतर्गत आने वाले वर्गों को दिया जाता है ताकि लाभ समान रूप से वितरित हो।
- आरक्षण व्यवस्था पर मेरिट, प्रशासनिक दक्षता, आर्थिक आधार और दीर्घकालिक सुधार को लेकर निरंतर राष्ट्रीय बहस जारी है।





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