व्हाइट हाउस ने पुष्टि की कि शीर्ष अधिकारियों ने एक सिग्नल मेसेजिंग ग्रुप में यमन में सैन्य योजनाओं के संवेदनशील विवरण गलती से द अटलांटिक के पत्रकार जेफ्री गोल्डबर्ग के साथ साझा किए। यह खुलासा 15 मार्च, 2025 को अमेरिका द्वारा यमन के ईरान-समर्थक हूथी विद्रोहियों के खिलाफ हवाई हमले से पहले हुआ था। इस गलती ने अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में गंभीर चिंताएं उठाई हैं, और इसके लिए जांच की मांग की गई है।
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- व्हाइट हाउस ने स्वीकार किया कि द अटलांटिक के पत्रकार जेफ्री गोल्डबर्ग को गलती से सिग्नल मेसेजिंग ग्रुप में शामिल किया गया था।
- इस ग्रुप का उद्देश्य यमन में हूथी विद्रोहियों के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई की समन्वय करना था, जो ईरान के समर्थक हैं।
- 15 मार्च को हवाई हमले से पहले सैन्य संचालन के विवरण, जैसे लक्ष्य, हथियारों और हमले की योजना, साझा किए गए थे।
- इस खुलासे को राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण उल्लंघन माना गया है और इसके लिए कांग्रेस में जांच की मांग की गई है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) के प्रवक्ता ने ग्रुप की प्रामाणिकता की पुष्टि की लेकिन यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को कोई खतरा नहीं था।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घटना से अनजान होने की बात कही, और इसके बाद जांच शुरू की गई।
- डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस लीक की आलोचना की, इसे अवैध और खतरनाक बताया और जवाबदेही की मांग की।
- ग्रुप चैट में अमेरिकी सहयोगियों और हमलों के समय को लेकर आंतरिक बहसें भी सामने आईं।
- कुछ अधिकारियों ने यूरोपीय सहयोगियों के प्रति अमेरिकी समर्थन पर निराशा व्यक्त की और सैन्य हमलों के समय को लेकर सवाल उठाए।
- इस घटना ने संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग और अमेरिकी कानूनों के उल्लंघन की आशंका को जन्म दिया है।





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