विधेयक आमतौर पर तब निरस्त होता है जब लोकसभा या राज्य विधानसभा भंग हो जाती है। राज्यसभा और विधान परिषद स्थायी सदन हैं, इसलिए उन पर यह नियम लागू नहीं होता। संविधान के अनुच्छेद 107 और 108 इस प्रावधान को स्पष्ट करते हैं।
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- लोकसभा भंग होने पर उसमें लंबित सभी विधेयक निरस्त
- लोकसभा में प्रस्तुत और लंबित विधेयक → निरस्त
- राज्यसभा में पारित पर लोकसभा में लंबित विधेयक → निरस्त
- लोकसभा में पारित पर राज्यसभा में लंबित विधेयक → निरस्त
- संशोधन सहित लौटाया गया विधेयक, लंबित → निरस्त
- केवल राज्यसभा में लंबित विधेयक → निरस्त नहीं
- दोनों सदनों से पारित पर राष्ट्रपति की स्वीकृति लंबित → निरस्त नहीं
- राष्ट्रपति द्वारा पुनर्विचार हेतु लौटाया गया विधेयक → निरस्त नहीं
- भंग से पहले संयुक्त बैठक की सूचना वाले विधेयक → निरस्त नहीं
- राज्यों में विधानसभा पर यही नियम, परिषद के विधेयक निरस्त नहीं
- स्थगन या सत्रावसान से विधेयक प्रभावित नहीं, केवल भंग से होता है
- उदाहरण: 15वीं लोकसभा के अंत में 68 विधेयक निरस्त हुए, जिनमें महिलाओं के आरक्षण बिल शामिल





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